रमजान कैसे मनाया जाता है 2020
रमजान क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है?
किसी भी मुस्लिम समुदाय से पूछा जाये तो रमजान क्यों मनाये जाते है तो वो जरूर बता सकेंगे पर वही दूसरे समुदाय से पूछा जाये तो की रमजान क्यों मनाई जाती है तो शायद ही कोई बता सकेंगे हमें भारतीय होने के कारन हमें यही जरूर पता होना चाहिए आइये जानते है रमजान क्या है ऐसे क्यों मनाया जाता है भारत समेत अन्य दूसरे देश के लोग अपने अल्लाह के प्रति श्रद्धा हेतु वे लोग रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखे जाते है मुसलमानो दवारा अपने ईश्वर के प्रति कृतग्यता प्रगट करने के लिए रोजा रखते है।
मुस्लिम समुदाय के लोग इस पावन पर्व को रमजान के महीने में मतलब “इबादत के महीने ” कहे जाने वाली इस महीने की शुरवात कब हुई ? मुस्लिम समुदाय दवारा रोजा रखे जाने का कारन क्या है ? रमजान के इतिहास में इसका इतना क्यों महतव है?
इस लेख में आपको रमजान के बारे में पूरी और सटीक जानकारी दिए जाएगी यदि आप इस लेख के बारे जानने चाहते है तो आप सही पेज पर आये है वैसे हमने पूरी कोशिश की है आप लोग तक सही बात और सटीक जानकारी पहुंचने की बिना देरी किये इस विषय की शुरुवात करते है सबसे पहले जानते है रमजान क्या है और क्या महत्व है?
रमजान क्या है ? What is Ramjan in Hindi
रमजान या रमदाम ( उर्दू अरबी फ़ारसी ) इस्लामी कैलेंडर का नोवा महीना होता है जिसमे हर साल मुस्लिम समुदाय दवारा रोजा रखे जाते है इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना उसके लिए “अल्लाह से इबादत ” का महीना होता है
मान्यता यह है की रमजान के अवसर पर दिल से अल्लाह को याद करने वाले हर सख्स की खवाहिश पूरी होती है रमजान के मौके पर मुस्लिम समुदाय दवारा पुर महीने रोजा रखे जाते है रोजा रखने का अर्थ यही है की वास्तव में सच्चे दिल से अल्ल्हा के प्रति कृतग्यता प्रगत करना होता है।वैसे तो वे धार्मिक लोग जिनकी इस दौरान तबियत ख़राब होती ऐसे लोग जिनकी उम्र अधिक होती है , जो महिला गर्भ होती है और अन्य परेशानियों के कारन रोजा रखने में अश्मर्थ होती है उन्हें रोजा रखने की इजाजत नहीं देता है ।
रमजान कैसे मनाया जाता है?
रमजान के महीने में रोजा रखने के द्वारं मुस्लिम समुदाय द्वारा दिन भर भोजन या जल ग्रहण नहीं किया जाता है साथ में इस समय कोई भी बुरी आदत जैसे सिगरेट ,वाइन और तम्बाकू का सेवन करना शख्त मन होता है।
रोजा रकने वाले लोग सूर्य उगने से पहले थोड़ा भोजन खाया जाता इस समय को मुस्लिम समुदाय दौरान सेहरी भी कहा जाता है दिन भर रोजा रखने बाद शाम के टाइम के भोजन ग्रहण करने को इफतार कहा जाता है।
रमजान के महीने में रोजा रखने वाले लोग खजूर खा कर उपवास तोड़ते है क्युकी इस्लामिक मान्यताओं से पता चला है की अल्लाह के दूत अपना रोजा खजूर खा कर तोड़ते को कहा गया है तब से रोजा रखने वाले लोग सहरी और इफ़्तार में खजूर कहते है।
इसके साथ साथ खजूर सेहत के लिए अच्छा होता विज्ञानं के अनुसार खजूर पेट और लिवर से सम्बन्धी एवं अन्य बीमारियों से भी बचा जा सकता इसलिए रोजा रखने वाले लोग खजूर को जयदा अहमियत देते है।
रमजान का यह महीना ईद -उ-फितर से समापत होता है जिसे मुस्लिम समुदाय के लोग मीठी ईद भी कहते है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग हर्षोउल्लास धूम धाम से मानते है नएनए कपडे पहनकर महजिद या ईदगाह जाते है और नमाज पढ़कर खुद को और एक दूसरे को गले मिलकर शुक्रिया और बधाई देते है।
रमजान का क्या महत्व ?
मुस्लिम समुदाय हर व्यक्ति के लिए रमजान का महीना सब पवित्र माना जाता है। रमजान के इस पवित्र महीने में रोजा रखे जाने पर मान्यता यह है की व्यक्ति की अल्लाह द्वारा उसके सभी गुनाहो का माफी दिए जाती है। मतलब रमजान एक पवित्र महीने को मुस्लिम समुदाय विशेष महत्व देते है उनलोगो का मान्यता यह है की उनके के लिए जन्नत का दरवाजा खुल जाता है इसलिए मुस्लिम समुदाय के लिए इस पर्व को ज्यादा महत्त्व देते है ।रमजान क्यों मनाया जाता है ?
इस्लामधर्म के क़ुरान के मान्यताओं का यह है की मुस्लिम समुदाय के लोग अपने ऊपर नियन्त्र और सयम रखने का एक बेहतरीन समय रमजान का महीना होता है रमजान के महीने में रोजा रखने के मुख्या कारन यह की अपने से निचे मतलब गरीब लोगो का दुःख दर्द को समझना होता है।
रोजा रखने के द्वारं किसी भी तरह का बुराई जैसे की बुरा ना सुनन बुरा ना बोलना बुरा ना देखना और ना ही बुरा एहसास करना होता है इस तरह रमजान में रोजा रखने के बहाने में कुछ बदलाव महसूस करते वे महसूस करते है की उनकी शरीर में एक बेहतरीन एनेर्जी फ्लो कर रही है जिसे वे उत्तेजित लगते है ।
रमजान मनाने का इतिहास क्या है ?
इस्लाम धर्म में रमजान में रोजा रखने का प्रथा काफी पुराना है इस्लामिक धर्म के अनुसार मोहमद साहब (इस्लामिक पैगम्बर ) को वर्ष ६१० ईस्वी में इस्लाम की पवित्र किताब कुरान सरीफ का ज्ञान हुवा तो तब से ही रमजान महीने को इस्लाम धर्म के पवित्र माह के रूप में मान्य जाने लगा है ।इस्लाम धरम के इस महीने का पवित्र होने का एक मुख्या वजह यह है की कुरान के मुताबिक पैगम्बर साहब को अल्लाह ने अपने दूत के रूप में चुन लिए था इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग इस महीने को पवित्र के रूप मने लगे है।
रमजान की क्या सच्चाई है ?
इसके आलावा रमजान के त्योहार में रोजा रखने से सम्बन्धित कुछ गलत धारना फैला राखी है चलिए थोड़ा उनकी सचचाई जान लेते है
मुस्लिम समुदाय के लोग कहते है की रमजान समय रोजा रखना आवश्यक होता है परंतु यदि कोई व्यक्ति बीमार है या कोई महिला गर्भधारण है तो जरुरी नहीं है की उन्हें रोजा रखना अनिवार्य है ऐसा कुरान में कही नहीं लिखा है।
इसके अलावा लोगो ने यह गलता धरना फ़ैला रखी है किसी रोजा रखने इंसान के सामने भोजन नहीं करना चाहिएयदि रोजा के समय मजिद नहीं गए तो अनर्थ हो जायेगा।
निषकर्ष
कुल मिलाकर यही बात सामने आती है की रोजा रखने उचित रूप साधारण रूप पालन किया जाये ईशवर के प्रति सच्ची दिल इबादत करे अल्ल्हा जरूर फरमान करेगा।
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